तिले धारू बोला। शब्द की उत्पत्ति तथा शब्द का मतलब ।

नमस्कार दोस्तों।

यदि आप उत्तराखंड से हैं तो तिले धारू बोला शब्द आपने कई बार सुना होगा कई गीतों में इसका इस्तेमाल किया गया है और यह शब्द एक जीवन शैली बन चुका है।



हालांकि आप में से कई लोग इस शब्द का सही सही मतलब नहीं जानते होंगे।

अगर सही मायने में देखा जाए तो यह शब्द काफी पुराना है और यह एक सांस्कृतिक धरोहर की तरह हम सब से जुड़ा हुआ है इन पंक्तियों का या फिर कहें इस तरह के शब्दों का सही अर्थ क्या है यह इसके जानने वाले और इसका सही रूप में उपयोग करने वाले गढ़वाली गीतकार व गढ़वाल रत्न श्री नरेंद्र सिंह नेगी जी द्वारा बताया गया है।

GARHWALI KID DANCE




श्री नरेंद्र सिंह नेगी जी द्वारा इस शब्द की विवेचना इस प्रकार की गई है।

तिले धारू बोला अर्थात तिल धारी बोल।

या कहें अपनी बात को रखना या अपने शब्दों पर बने रहना या फिर कहें एक बात को कहना।

पुराने समय में जब राजा महाराजाओं द्वारा उत्तराखंड के वीर सपूतों वीर बढ़ो या फिर कहें सेनापतियों द्वारा प्रतिज्ञा ली जाती थी तब यह उपाधि दी जाती थी तिले धारू बोला अर्थात वीरों द्वारा ली जाने वाली प्रतिज्ञा।

आशा करते हैं यह जानकारी आप आने वाली पीढ़ी आने वाले कल और आने वाले भविष्य के उज्जवल वीरों को पहुंचाएंगे धन्यवाद।


Comments

  1. Bahut hi saral shabdo mein itne purane shabd ka arth bataya jo ki bahut hi sarahniya hai

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