चीन के जिन रणनीतिकारों ने इस समय लद्दाख में घुसकर भारतीय भूमि हड़पने की योजना बनाई होगी वह इस समय अपना माथा पीट रहे होंगे, क्योंकि चीन को इस समय भारत के विरुद्ध लेने के देने पड़ जाने वाली स्थिति का सामना करना पड़ रहा है,
1962 में चीन ने फिंगर 8 से लेकर फिंगर 5 तक का इलाका कब्जा कर लिया था, परंतु उनकी सैन्य डेप्लॉयमेंट फिंगर 8 के पीछे ही हुआ करती थी, फिर भी 2013 तक चीन ने फिंगर 5 तक मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर अवश्य बना लिया था, और मई 2020 में चीन ने अपनी पुरानी क्रीपिंग फॉरवर्ड पॉलिसी के अंतर्गत फिंगर 5 से आगे बढ़कर नो मैंस लैंड में फिंगर 4 के आगे डेरा डाल लिया, ये सब कुछ यह सोचकर किया गया कि भारतीय सीमा पर तनाव बनाकर भारतीय सैनिकों पर छिटपुट हमले कर व् अपनी कूटनीतिक, सैन्य व् आर्थिक शक्ति का दबाव बनाकर भारत को इस इलाके से पीछे खदेड़ा जा सकेगा,
https://youtu.be/XvERVaUQa58
परंतु संभवत चीन भूल गया था कि अब भारत में चीन से पैसा लेकर उसके आगे हाथ जोड़ने और सर झुकाने वाले चीन के पाले हुए कांग्रेसी चपड़ों कि नहीं अपितु राष्ट्रवादियों की सरकार है,
चीन ने मूर्खता में पहले एक दुःसाहस किया और भारत के 1:5 के रेशियो से आउटनम्बर सैनिकों ने 20 जवानों का बलिदान देकर अपने हाथों से चीन के 100 से अधिक सैनिक बर्बरतापूर्वक कुचल दिए, और पूरी दुनिया में चीन के हव्वे का मजाक बनकर रह गया,
चीन ने पुनः आक्रामकता दिखाई तो भारतीय सेना ने 4 किमी आगे बढ़कर 1962 से चीन के कब्जे में रही महत्वपूर्ण रकिन घाटी ही नही अपितु स्पंगुर की पहाड़ी चोटियां कब्जा कर लीं जिससे स्पंगुर झील और वहां की स्ट्रैटिजिक रोड पर भी भारतीय सेना कमांडिंग पोज़िशन में पहाड़ियों पर जा बैठी, और लगे हाथ ब्लैक टॉप ,हेलमेट टॉप, रेकीन ला, हुनान, त्रिशूल, स्पंगुर गैप पर कब्जा कर लिया गया, और आज लेटेस्ट समाचार आया की जो भारतीय सेना अभी तक फिंगर 4 पर ग्राउंड पोजीशन पर बैठी हुई थी अब उसी भारतीय सेना ने आगे बढ़कर फिंगर 4 की ऊंची पहाड़ियों पर पोज़िशन ले ली है जिससे पैंगोंग में बैठी चीनी ग्राउंड फोर्सेज़ भी भारतीय सेना के रहमोकरम पर आ गयी है।
आज वास्तव में चीन दुख मना रहा होगा कि इतने वर्षों में कांग्रेस के सत्ता में रहते हुए उसने भारत के साथ अपनी सीमा क्यों नहीं निर्धारित कर ली, जिस रणनीति को चीन अपना ट्रम्पकार्ड समझ रहा था आज भारत के संग अपने बॉर्डर निर्धारित ना करने की रणनीति ही उसके गले को निरन्तर जकड़ने वाला अजगर बन गयी है।
चीन अब यदि समझदारी दिखाते हुए चुपचाप पूंछ टांगों के बीच दबाकर वापस अप्रैल वाली स्थिति की ओर चला जाता है तो डोकलाम और गलवान के बाद भारत के हाथों फिर लज्जित होने पर पुनः दुनिया भर में चीन की मिट्टी पलीत होगी, और यदि चीन सैन्य विकल्प चुनता है तो इलाके के पहाड़ों की ऊंचाईयों पर बैठी भारतीय सेना चीनी सैनिकों का काल साबित होगी।
~~
ये वो रणनीतिक पहाड़ियां हैं जहां अब तक तिरंगा स्थापित किये जा चुके है :-
🔸 ब्लैक टॉप
🔹 हेलमेट टॉप
🔸 रेकीन ला
🔹हुनान
🔸 त्रिशूल
🔹 स्पंगुर गैप
Comments
Post a Comment